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Showing posts from August, 2023

श्री 108 श्री स्वामी रामदासजी काठिया बाबा का जीवन चरित्र | Part 04

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  श्रीरामदासजी की सभी आवश्यकीय वस्तुएँ बिना मांगे ला लाकर लोग पंहुचा देते थे।  दो-तीन रूपए के गांजे और चरस की भेंट नित्य आ जाती थी। और इसी भांति खाने की सभी सामग्रियां भी आ जाती थी। इस वैभव को देखकर चोरों ने विचारा कि उन्होंने बहुत रूपए बटोर कर रख लिए होंगे, इसलिए रात्रि में आकर वे कभी कभी  उत्पात मचाने लगे। रात्रि के चोर दिन में सज्जन बनकर फिरते थे। चोरों में कोई ब्राम्हण, कोई क्षत्रिय तथा कोई अन्य जाती के थे। उन में से कोई- कोई दिन में  उनके पास आ बैठते और तमाखू, गाँजा पीते तथा गप - शप करते थे। एक दिन सवेरे ऐसे ही तीन भद्रवंशोद्भव वृन्दावनवासी चोरों ने उनके पास बैठकर बातें करते-करते किसी बात से उत्तेजित होकर उनसे कहा -"बाबाजी! सिंह की भाँति निर्भय होकर बातें  करते हो, इसका फल एक दिन रात को भली- भांति पाओगे।" तब श्रीरामदासजी ने कहा -"मैं अच्छी तरह जानता हूँ कि तुम लोग चोट्टे-बदमाश हो, पर अब तुम इतने बढ़ चढ़ रहे हो कि साधु को भी धमकाने लग गए हो। अच्छा मैं कह देता हूँ कि तुम आज ही पुलिस से पकड़ लिए जाओगे।"  चोरों ने कहा  -"अरे, रहने दे बाबाजी तेरी सिद्धाई...

श्री 108 श्री स्वामी रामदासजी काठिया बाबा का जीवन चरित्र | Part 03

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 गुरूजी के देहांत के पश्चात श्री रामदासजी ने बहुत कठोर तपस्या की। ग्रीष्मकाल में प्रचंड उत्ताप से लू चलती थी उस समय वे पंचाग्नि के अंदर बैठकर योग- साधना में निमग्न रहते थे। एक समय श्री रामदासजी एक गांव में पंचाग्नि में बैठे हुए थे , गांव के लोग उनपर बड़ी श्रद्धा -भक्ति करने लगे। उनके साथ एक और  साधु था।  वह श्री रामदासजी से  ईर्ष्या करने लगा और उनका वध करने का संकल्प उसने किया। एक दिन श्री रामदासजी जब पंचाग्नि के बिच योगासन में  बैठकर तन्मय थे , उस समय उस साधु ने उनके चारो ओर लगभग एक सौ कंडो (मोटी लकड़ी ) को इस प्रकार से सजा दिया कि कंडों के घेरे ने उनके सर से  ऊँचा होकर उनको बिलकुल अलक्षित कर दिया। (ढक दिया )फिर उस साधु ने उन कंडों में आग लगा दी | जब अग्नि प्रज्वलित हुई तब चारो ओर कंडों की आग एक ही लौ से धधकने लगी। उस समय वह साधु भाग गया। गांव के लोगों ने वहां आकर धधकती हुई उग्रज्वाला देखकर सोचा कि अग्नि ने श्री रामदासजी को अवश्य ही भस्म कर दिया होगा।  जब समस्त कंडे जल गए , अग्निज्वाला बुझ गई और उनका भी ध्यानभंग हुआ तब देखा गया कि उनके शरीर पर अग्निदे...

स्वर्ण रसायन से सम्बंधित महत्वपूर्ण ग्रंथ

स्वर्ण बनाने का विज्ञान अल्केमी के अंतर्गत आता है, जो कि पुरातन समय से ही एक रहस्यमय कला रही है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो, आज तक स्वर्ण को विज्ञान के माध्यम से सीधे बनाने की कोई सटीक विधि नहीं पाई गई है। भारत के प्राचीन विद्वान इसमें पारंगत थे |  अल्केमी दरअसल एक प्राचीन विज्ञान था जिसका मुख्य उद्देश्य धातुओं को बदलकर उन्हें स्वर्ण या रजत बनाना था। वे धातुएँ जो स्वर्ण बनाने के लिए उपयुक्त मानी जाती थीं, उनमें सोना, चांदी, पारा, राजत और कच्चा सोना शामिल थे। महत्वपूर्ण स्वर्ण रसायन से संबंधित ग्रंथों की सूची : 1 . ऋग्वेदोक्त श्री सूक्त : Book 2 . लक्ष्मी तंत्र : Book 3 . रुद्रयामल तंत्र : Book 4 . काकचण्डीश्वरी कल्प तंत्र : 5 . रस हृदय तंत्र (गोविंदपादाचार्यकृत) 6 . गोरक्ष संहिता (गोरक्षनाथ रचित) : Book 7 . रसाव्यय (कंकालयोगी कृत) : 8 . रस रत्नाकर रसायन खण्ड (सोमदेव) 9 . रस प्रकाश सुधाकर - यशोधर 10 . रस कौमुदी ज्ञानचंद 11 . सिद्ध रसायन - वृक्ष मोरे 12 . पारद-संहिता - संकलित : Book 13 . स्वर्ण तंत्रम् (पूज्य गुरुदेव डॉ. नारायणदत्त श्रीमाली कृत) 14 . रसरत्नाकर ऋद्धि खण्ड ...

श्री 108 श्री स्वामी रामदासजी काठिया बाबा का जीवन चरित्र | Part 02

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  एक बार  विचरते हमलोगों को कुछ दूर पर छोड़ गुरु महाराज ने भूपाल ताल पर जा अपना आसन स्थापित किया और उसपर बैठ कर उन्होंने बड़े वेग से शंख -ध्वनि की | समीप ही ताल की दूसरी ओर एक मुसलमान  नवाब का निवास स्थान था | उसने कुछ दिन पूर्व यह घोषणा की थी कि उसके निवास स्थान के निकट कहीं  भी  शंख अथवा घंटा की ध्वनि न हो |  जो कोई ध्वनि करेगा उसका सर काट दिया जाएगा  | गुरूजी के जोर से शंख बजाने  से  उसकी ध्वनि नवाब के कानों में पहुंची | तब उसने  अपने अनुचरों को यह आज्ञा दी कि -"जाकर देखो , कौन मेरी आज्ञा की अवज्ञा कर शंखध्वनि कर रहा है |" तत्काल ही नवाब के अनुचरों ने द्रुतवेग  से ताल पर जा कर देखा  कि गुरुदेव हाथ में  शंख लिए बैठे है  और वे तुरंत लौट कर नवाब से बोले  -"  एक जटाजूटधारी तेजस्वी योगी ने शंख बजाया  है  |" इसपर नवाब ने कहा -" वह इतना धृष्ट है कि मेरी आज्ञा का उलंघन कर मेरे घर के समीप ताल पर बैठ कर शंखध्वनि कर रहा है | तुरंत जाकर उसके  मस्तक को काट डालो  या उसको पकड़ कर मेरे पास लाओ |" नवाबसाह...

श्री 108 श्री स्वामी रामदासजी काठिया बाबा का जीवन चरित्र | Part 01

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जीवन चरित्र श्री स्वामी रामदासजी कठिया बाबा का जन्म  1700  में  आषाढ़ी पूर्णिमा के दिन , अमृतसर से लगभग बीस कोस दूर लोनाचमारी नामक गांव में एक ब्रम्हाण वंश में हुआ था । उनके माता - पिता ने उनका नाम जयराम रखा था। उनके माता - पिता उस गांव के सम्मानित लोगों में गिने जाते थे । जयराम अपने माता - पिता के तीसरे पुत्र थे ।  उनके पिता के घर के निकट ही एक संत रहा करते थे | जयराम बचपन में उनके पास  जा कर बैठते थे | संत महाराज उनपर बहुत स्नेह रखते थे | गाँव के छोटे बड़े सभी प्रकार के लोग प्रतिदिन उनके दर्शन के लिए आते थे और उनको शाष्टांग दण्डवत किया करते थे | बालक जयराम  देखते और अपने मन में विचारते कि इस संसार में ये महात्मा ही सबसे बड़े है | यह देख जयराम की उनके प्रति  अपार  श्रद्धा हो गई |  एक दिन चार वर्ष की अवस्था में वे जब उन संत के पास अकेले बैठे थे उस समय वे महात्मा जी बड़े स्नेह के साथ उनसे इधर उधर की बाते कर रहे थे कि इतने में उन्होंने उनसे कहा , "महाराज आप इस संसार में सबसे बड़े है , सभी लोग आ-आ कर आपके चरणों में माथा टेकते है , आपसे मैं पूछन...

सिद्ध संतो की जीवनी

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 प्रिय सिद्धज्ञान परिवार, हम सभी को सदैव समर्थन और प्रेरणा देने के लिए आपका स्नेहपूर्वक स्वागत है। सिद्ध संतो की खोज चैनल ने अपने साक्षात्कार्य में एक विशेष जगह बना ली है और यह आप सभी के समर्थन के बिना संभव नहीं था  हम आपकी मदद के लिए आभारी हैं। इस ब्लॉग में आपको सिद्ध संतो की जीवनी उनके दुर्लभ ज्ञान और उनकी समाधी स्थलों के बारे में जानकारी दी जाएगी ,इसके साथ-साथ वेद,पुराण और उपनिषद से भी सम्बंधित जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी | अगर आप कोई सुझाव देना चाहते है तो आपका स्वागत है | आप हमें WhatsApp कर सकते है |  आपके द्वारा दिए गए योगदान के माध्यम से, हम इस ब्लॉग को और भी समृद्ध कर सकते हैं और ज्यादा जानकारी आप तक पहुंचा सकते हैं। हम आपकी सहायता के लिए धन्यवाद देते हैं और आशा करते हैं कि हम आपके साथ इस सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचेंगे। यदि आप सहयोग करते हैं तो निम्नलिखित सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी |  1. आध्यात्मिक pdf (Ebook) 2. समाधी स्थलों के Google map पता 3. संतों के दुर्लभ फोटो  4. दुर्लभ जानकारी जिसे आप keywords से सर्च कर सकते हैं। आपके द्वारा दिए...